भव्य
प्रश्न जटिल उत्तर से पूछा
कैसे वक्तव्य करूं
अगर हल हो तुम मेरे प्रश्नों का
तो हल किसे कहूं
नयन मेरे बंजर और तू है
सावन की हरियाली
मेरे ख्वाब खंडहर
और तू है फूलों सी मतवाली
झरनों के झर झर में
सुनता रहता तेरा मधुर गान
बीच बसंत बैठ
मै लूं तेरे रूप का रस पान
कैसे बोलूं कैसे तोलूं
रूप तेरा संगम सा
जैसे यमुना और गंग में
हुई विलीन सरस्वती
हुआ विलीन मगन मै
तेरी मधुर संस्मृति।
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