उमस
उन दिनों बहुत गर्मी थी आसमान की तरफ देखो तो वो आग उगल रहा था। छोटी पतली सी पकी ईंटों और गारे की दीवार कुछ अलग ही रौब बनाए खड़ी थीं। पेड़ों से भाप निकलती दिखाई पड़ रही थी पत्तियां कुम्हलाई हुई थी। हवा बिल्कुल शांत थी। बंदर भी अपनी धमा चौकड़ी भूल चुके थे। गाएं बैठी थीं लेकिन उनके पेट तेजी से ऊपर–नीचे ऊपर–नीचे हो रहे थे। कुत्ते बड़ी सी जीभ निकाले हांफते हुए इधर उधर भाग रहे थे। नीम के पेढ़ के नीचे कुछ बच्चे विचित्र खेल खेलने में मग्न थे। मै भी पुरानी जंग लगी खिड़की से बाहर देखे जा रहा था। धन्नी में लगे सीलन खाए ईंटों के बीच में कमल के चिन्ह जैसी आकृति बनी थी। आसपास का माहौल गुमसुम सा बना हुआ था।
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